सतना जिले के 267 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को दो वर्षों से 4 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। नाराज सीएचओ ने जिला लेखा प्रबंधक कार्यालय का घेराव कर चेतावनी दी कि मार्च तक भुगतान नहीं हुआ तो ऑनलाइन कार्य बंद करेंगे।
सतना जिले के परसमनिया पीएचसी में चौंकाने वाला मामला सामने आया। रिकॉर्ड में मेडिकल ऑफिसर की सिर्फ 70 दिन उपस्थिति, लेकिन 3 हजार ओपीडी और 4 हजार ब्लड टेस्ट दर्ज। मिशन डायरेक्टर ने जांच के निर्देश दिए।
सतना जिले के कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डिजिटल एक्सरे मशीन दो साल से निष्क्रिय है। ट्रांसफार्मर न लगने से मरीजों को एक्सरे के लिए सतना शहर जाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने चंदा जुटाकर मदद की पेशकश की, बावजूद इसके अफसरों की लापरवाही के कारण काम अब तक अधर में है। स्वास्थ्य विभाग और बिजली विभाग के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल जारी है, जबकि मरीज लगातार परेशान हैं।
सतना जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर। गर्भवती महिलाओं को 50 रुपए के बजट की जगह सिर्फ 20 रुपए का आहार दिया गया। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल, एजेंसी पर कार्यवाही की तैयारी।
सतना जिले की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में अब ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है। सार्थक ऐप से उपस्थिति दर्ज होने पर ही सितंबर माह की सैलरी जारी होगी। जीपीएस लोकेशन, फेस रिकग्नाइजेशन और ड्यूटी रोस्टर के आधार पर जांच की जाएगी। आदेश का पालन न करने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
सतना जिले में बरसात के चलते संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। उल्टी, दस्त, पीलिया, हैजा, मलेरिया और डेंगू जैसे रोगों की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों का गठन किया है। सभी ग्रामों में डिसइंफेक्शन और जागरूकता अभियान जारी है।
कोरोना काल में सतना जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2 करोड़ से अधिक की राशि के गबन का आरोप अमरपाटन विधायक और पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र सिंह ने सदन में उठाया है। उन्होंने बीएमओ और तत्कालीन सीएमएचओ की संलिप्तता की बात कही है। फोटोकॉपी सेंटर को दिए गए लाखों के भुगतान ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। जांच और ऑडिट की मांग की गई।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सतना-मैहर में दस्तक अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत 22 जुलाई से होगी। 0-5 साल के बच्चों में दस्त, निमोनिया, कुपोषण जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए 2.97 लाख बच्चों की स्क्रीनिंग, दवा वितरण और माता-पिता की काउंसिलिंग की जाएगी।
सतना जिला अस्पताल की संवेदनहीनता एक बार फिर उजागर हुई है। सीएमएचओ के आदेश के बावजूद नए स्ट्रेचर में दवाइयां ढोई जा रही हैं और मरीजों को जर्जर, कबाड़ स्ट्रेचर मिल रहे हैं। यह लापरवाही मरीजों की जान जोखिम में डाल रही है। अस्पताल प्रशासन की अनदेखी और सिस्टम की खामियां एक बार फिर चर्चा में हैं। पूरा सच जानिए इस रिपोर्ट में।





















